अपना वंश आगे चलाने की प्रबल इच्छा उसके ह्रदय में प्रतिपल प्रतिक्षण विधमान रहती है l रजोदर्शन के बाद स्त्री -पुरुष के संसर्ग से संतान की उत्पत्ति होती है
This book deals with the Ganita Jyotisha
दो हज़ार साल पहले एक ऊंटवाले लड़के की कहानी जो अपनी कमतर जिंदगी को वेहतर बनाने की प्रबल इच्छा रखता था l उसकी काबिलियत को परखने के लिए उसे पैन्थ्रोस नाम का मालिक सिर्फ एक चोंगा बेचने के लिए बेथलेहम भेजता है l वह नकाम होता है और इसके अलावा आत्म दया के एक पल में सराय के नजदीक एक गुफा में नवजात शिशु को गर्माहट देने के लिए वह उस चोंगे को दान में दे देता है l
यह बात ही व्यर्थ है I पांच बच्चे गए
" But Pablo wasn't so sure
Rahasyamay Vakri Graha [Hindi] Autobiography of a Yogi [English] अपना वंश आगे चलाने कीAuthor MG Kastwar , l l , , , , l l l : , , , , , ,